कोई हमदर्द होता नहीं सिर्फ़ हम होते हें
दो पल हम साथ चलते है फिर अलग हो लेते हें
हर किसी को अपनी मंजिल बुलाती है
फिर हम..हम और वो..वो हो लेते हैं

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